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उत्तर प्रदेश · 15 October 2026 · · 179 बार देखा गया

मध्यस्थता से फिर एक हुए दंपती, पुराने गिले-शिकवे भुलाकर साथ रहने का लिया संकल्प

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राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 के तहत सोनभद्र में मिली सफलता, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर सुलझा वैवाहिक विवाद
सोनभद्र,।आपसी मनमुटाव के कारण लंबे समय से अलग रह रहे एक दंपती के बीच राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 के तहत सुलह हो गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र की पहल और मध्यस्थ अधिवक्ता के प्रयासों से पति-पत्नी ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर फिर से एक साथ रहने का निर्णय लिया। मध्यस्थता के माध्यम से हुए इस समझौते से न केवल वैवाहिक विवाद को सुलझाने में सफलता मिली, बल्कि आपसी संवाद और समझदारी के जरिए रिश्तों में आई दूरियों को कम करने की दिशा में भी सकारात्मक पहल हुई।प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पनिकप खुर्द निवासी चांदनी पत्नी मनोज सोनी ने अपने विवाद के समाधान के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र में प्री-लिटिगेशन वाद दाखिल किया था। मामले को आगे बढ़ाते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने मध्यस्थ अधिवक्ता श्रीमती चन्द्रावती जैसवार को सुलह-समझौते की कार्यवाही के लिए नियुक्त किया।मध्यस्थ अधिवक्ता ने दोनों पक्षों के बीच प्रभावी और सौहार्दपूर्ण बातचीत कराई। इस दौरान दोनों पक्षों को अपनी बात रखने तथा आपसी मतभेदों को दूर करने का अवसर मिला। मध्यस्थता के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया और दोनों पक्ष आपसी सहमति से साथ रहने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद दंपती ने पुराने विवादों को पीछे छोड़ते हुए फिर से साथ रहने का निर्णय लिया।आपसी सहमति से विवादों के समाधान पर जोर
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा सर्वोच्च न्यायालय की मीडिएशन एवं कंसीलियेशन प्रोजेक्ट कमेटी के निर्देशानुसार जनपद सोनभद्र में राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 संचालित किया जा रहा है। जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के आदेशानुसार यह अभियान 1अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक चलाया जा रहा है।
इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य न्यायालयों में लंबित ऐसे मामलों की पहचान कर उनका मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारण कराना है, जिनमें दोनों पक्षों के बीच बातचीत और आपसी सहमति से समाधान की संभावना हो। इसके साथ ही न्यायालय में मुकदमा दाखिल होने से पहले ही उपयुक्त विवादों को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।मध्यस्थता की प्रक्रिया में दोनों पक्षों को अपनी बात रखने और विवाद के समाधान पर सहमति बनाने का अवसर मिलता है। इससे आपसी मतभेदों को दूर करने तथा विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।वैवाहिक विवाद समेत कई मामलों में मिल सकती है राहतसिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र के सचिव राहुल ने बताया कि राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 के अंतर्गत केवल वैवाहिक विवाद ही नहीं, बल्कि कई अन्य उपयुक्त मामलों का भी मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारण कराया जा सकता है।उन्होंने बताया कि मोटर दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा से संबंधित उपयुक्त मामले, चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, सेवा विवाद, शमनीय आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, संपत्ति बंटवारा, बेदखली, भूमि अधिग्रहण सहित अन्य उपयुक्त दीवानी मामलों में मध्यस्थता के जरिए समाधान की संभावना तलाशी जा सकती है।इन मामलों में संबंधित पक्षकार आपसी बातचीत और सहमति के आधार पर विवाद का हल निकालने का प्रयास कर सकते हैं। इसके लिए पक्षकार स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से संबंधित मामले को चिह्नित कराकर मध्यस्थता केंद्र में भेजने का अनुरोध कर सकते हैं आमजन से अभियान का लाभ उठाने की अपील
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राहुल ने आमजन से अपील की कि वे राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 का लाभ उठाकर अपने विवादों का आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से समाधान कराने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जहां विवाद की प्रकृति और परिस्थितियां मध्यस्थता के अनुकूल हों, वहां आपसी संवाद के जरिए समाधान की राह निकाली जा सकती है।
सोनभद्र में चांदनी और मनोज सोनी के बीच मध्यस्थता से हुआ समझौता अभियान के तहत सामने आई एक महत्वपूर्ण सफलता है। इस मामले में दोनों पक्षों की सहमति से वैवाहिक विवाद को सुलझाने का प्रयास सफल रहा और दंपती ने फिर से साथ रहने का निर्णय लिया।राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास है कि अधिक से अधिक उपयुक्त विवादों का समाधान आपसी सहमति से हो सके। अभियान 31 दिसंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा, ऐसे में संबंधित पक्षकार मध्यस्थता केंद्र के माध्यम से अपने मामलों के समाधान की दिशा में पहल कर सकते हैं।

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रिपोर्ट: Umesh Singh · Pratibha Times 24 News

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