डॉ.कार्तिक उरांव की जन्म शताब्दी पर सोढ़ा-दुपटिया में सजा सांस्कृतिक महोत्सव, कलाकारों ने बिखेरे लोककला के रंग
चतरा (सोनभद्र)। डॉ. कार्तिक उरांव की जन्म शताब्दी के अवसर पर गुरुवार को विकासखंड चतरा के सोढ़ा-दुपटिया में जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव (कर्मा महोत्सव) का आयोजन किया गया। सेवा समर्पण संस्थान, सोनभद्र के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में जनजातीय लोककला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक देखने को मिली। क्षेत्र की विभिन्न टोलियों ने कर्मा नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को जीवंत किया।कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा और बालासाहब देशपांडे के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को बैज अलंकरण और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।महोत्सव में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम, उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री आनंद जी, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री जीत सिंह खरवार, सेवा समर्पण संस्थान के अध्यक्ष जेसी विमल सिंह तथा सदर विधायक भूपेश चौबे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
संस्कृति और भाषा ही समाज की पहचानअखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के संगठन मंत्री आनंद जी ने कहा कि जनजातीय समागम का उद्देश्य समाज की कला और संस्कृति की पहचान को बनाए रखना है। ऐसे आयोजनों से कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है और परंपराओं को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार ने कहा कि जनजातीय कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान है। बोली और भाषा किसी भी समाज की असली पहचान होती हैं। जनजातीय समाज का प्रकृति और जंगलों से गहरा जुड़ाव रहा है। डॉ. कार्तिक उरांव की जन्म शताब्दी पर कर्मा महोत्सव का आयोजन पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है।
लखनऊ तक गूंज रही क्षेत्र के कलाकारों की कर्मा की थाप
सदर विधायक भूपेश चौबे ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मा महोत्सव जैसे आयोजन जनजातीय संस्कृति को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। क्षेत्र के कलाकारों की प्रतिभा का दायरा अब स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ तक कर्मा की थाप गूंज रही है। यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।कार्यक्रम को श्रवण गोंड सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। महोत्सव के संयोजक मुन्ना धांगर ने बताया कि आयोजन में भीखमपुर, सिलथम, दुपटिया और आदिवासी इंटर कॉलेज समेत क्षेत्र की दर्जनों टोलियों ने भाग लिया। कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं को प्रदर्शित किया।इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के संगठन मंत्री रवींद्र जी, रामसेवक खरवार, शिवम मिश्रा, प्रवीण जी, डॉ. अंजनी द्विवेदी, शक्ति सिंह, पूर्व विधायक तीर्थराज, श्रवण गोंड, सतीश श्रीवास्तव, ज्योति खरवार सहित अनेक कार्यकर्ता और क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।
कर्मा की थाप पर झूम उठा चतरा, जनजातीय संस्कृति की दिखी अनूठी छटा

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रिपोर्ट: Umesh Singh · Pratibha Times 24 News



