ओबरा सी में 12 घंटे काम कराने और तीन महीने तक मजदूरी रोकने का आरोप, न्यूनतम वेतन के मुद्दे पर हाईकोर्ट जाने की तैयारी
सोनभद्र। ओबरा ठेका मजदूर यूनियन की बैठक में श्रमिकों की समस्याओं और उनके अधिकारों को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए। बैठक में लेबर कोड को आधुनिक गुलामी का दस्तावेज बताते हुए कहा गया कि इसके जरिए मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को कमजोर किया जा रहा है। वहीं, ओबरा में ईएसआई अस्पताल की स्थापना की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाने और उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी की दरों में संशोधन नहीं होने के मुद्दे पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया गया।यूनियन की बैठक में मुख्य वक्ता ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के प्रदेश महासचिव एवं पूर्व श्रम बंधु दिनकर कपूर ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए लेबर कोड कॉर्पोरेट घरानों के हितों को साधने वाले हैं। इन कानूनों के माध्यम से काम के घंटे बढ़ाने, फिक्स्ड टर्म इंप्लॉयमेंट लागू करने और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को कमजोर करने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि फ्लोर लेवल वेज की व्यवस्था के जरिए मजदूरों को कम मजदूरी पर काम करने के लिए मजबूर किए जाने की आशंका है। साथ ही, श्रम विभाग की शक्तियां सीमित कर उसकी भूमिका फैसिलिटेटर तक कर दी गई है। इससे श्रमिकों के शोषण पर प्रभावी नियंत्रण की व्यवस्था कमजोर हो सकती है। उन्होंने सरकार से श्रम कानूनों पर पुनर्विचार करने की मांग की।
ओबरा सी में 12 घंटे काम कराने का आरोप
बैठक में मजदूरों ने ओबरा सी परियोजना में कार्यरत विभिन्न कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। श्रमिकों का आरोप था कि कई कंपनियों में उनसे 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है, लेकिन निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। कुछ संविदाकारों पर तीन-तीन महीने तक मजदूरी का भुगतान नहीं करने का आरोप भी लगाया गया।
मजदूरों ने कहा कि बिजली उत्पादन जैसे जोखिमपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में काम करने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इससे श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं। बैठक में मांग की गई कि मजदूरों को नियमानुसार मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित कराया जाए और कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जाए।
ईएसआई अस्पताल के लिए हस्ताक्षर अभियान
बैठक में ओबरा में ईएसआई अस्पताल की स्थापना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। मजदूरों ने कहा कि ईएसआई के दायरे में आने के बावजूद उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्र में ईएसआई अस्पताल की स्थापना जरूरी है, ताकि श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।इस मांग को लेकर यूनियन ने हस्ताक्षर अभियान चलाने का फैसला किया। अभियान के जरिए मजदूरों की मांग को संबंधित अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
12 साल से न्यूनतम मजदूरी में संशोधन नहीं होने पर नाराजगी
बैठक में उत्तर प्रदेश में पिछले 12 वर्षों से न्यूनतम मजदूरी की दरों में संशोधन नहीं होने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन मजदूरों की मजदूरी में समयानुसार बढ़ोतरी नहीं होने से उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करने की चुनौती बढ़ती जा रही है।मजदूरों ने न्यूनतम मजदूरी की दरों में संशोधन की मांग करते हुए इस मामले को न्यायालय में उठाने का निर्णय लिया। बैठक में कहा गया कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
आदिवासी अधिकारों पर भी हुई चर्चा
बैठक की अध्यक्षता ठेका मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष तीरथ राज यादव ने की, जबकि संचालन मोहन प्रसाद ने किया। रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान के संयोजक रामकृष्ण बैगा ने आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में मजदूरों की समस्याओं, सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।इस दौरान इंद्रदेव खरवार, राहुल, अशोक जैसल, राम पधारत मौर्य, भगवान दास मौर्य, रामनरेश गोड़, विनोद जायसवाल, जगन्नाथ मिश्रा, मधुकांत यादव, प्रबल, डीएन राय, रामचंद्र माली, सिकंदर चंद्रवंशी, जितेंद्र मिश्रा और अजय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मजदूरों के हक पर हमला है लेबर कोड, आधुनिक गुलामी का दस्तावेज: दिनकर कपूर

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रिपोर्ट: Umesh Singh · Pratibha Times 24 News



